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mahabharat 12.118.d4: जो राजा धर्म के मार्ग पर चलता है, सदैव कार्य करने के लिए तत्पर रहता है तथा अपने शत्रुओं की उपेक्षा नहीं करता, इस पृथ्वी का राज्य लम्बे समय तक उसके नियंत्रण में रहता है।   |   mahabharat अध्याय 12.118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.118.d4 
नीतिमार्गानुसरणं नित्यमुत्थानमेव च।
रिपूणामनवज्ञानं तस्येयं सुचिरं मही॥
 
 
अनुवाद
जो राजा धर्म के मार्ग पर चलता है, सदैव कार्य करने के लिए तत्पर रहता है तथा अपने शत्रुओं की उपेक्षा नहीं करता, इस पृथ्वी का राज्य लम्बे समय तक उसके नियंत्रण में रहता है।
 
The king who follows the path of righteousness, is always ready to work and does not ignore his enemies, the kingdom of this earth remains under his control for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)