श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  12.118.d2 
आलस्यं चैव निद्रा च व्यसनान्यतिहास्यता।
यस्यैतानि न विद्यन्ते तस्यैव सुचिरं मही॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा में आलस्य, निद्रा, बुरी आदतें और अत्यधिक हास्य-विनोद जैसे दुर्गुण नहीं होंगे, वह इस पृथ्वी पर लम्बे समय तक शासन कर सकेगा।
 
The king who does not have the vices like laziness, sleep, bad habits and excessive love of humour, will have control over this earth for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)