श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.118.5 
कुलज: प्राकृतो राज्ञा स्वकुलीनतया सदा।
न पापे कुरुते बुद्धिं भिद्यमानोऽप्यनागसि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई कुलीन मनुष्य बिना किसी दोष के राजा द्वारा कभी अपमानित हो जाए और लोग उसकी निन्दा करें, तो भी अपने कुलीन जन्म के कारण वह कभी राजा को हानि पहुँचाने का विचार नहीं करता ॥5॥
 
If a man of noble birth is ever insulted by the king without any fault of his and people criticise him, then also due to his noble birth he never thinks of harming the king. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)