श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.118.28 
शक्या चाश्वसहस्रेण वीरारोहेण भारत।
संगृहीतमनुष्येण कृत्स्ना जेतुं वसुन्धरा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे भरत! जो उपर्युक्त पुरुषों को एकत्रित करता है, वह केवल एक हजार वीर घुड़सवारों के द्वारा सम्पूर्ण विश्व को जीत सकता है॥ 28॥
 
Bharata! He who gathers the above-mentioned men can conquer the whole world with just a thousand brave horsemen.॥ 28॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि श्वर्षिसंवादे अष्टादशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कुत्ता और ऋषिका संवादविषयक एक सौ अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ७ श्लोक मिलाकर कुल ३५ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)