हे भरत! जो उपर्युक्त पुरुषों को एकत्रित करता है, वह केवल एक हजार वीर घुड़सवारों के द्वारा सम्पूर्ण विश्व को जीत सकता है॥ 28॥
Bharata! He who gathers the above-mentioned men can conquer the whole world with just a thousand brave horsemen.॥ 28॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि श्वर्षिसंवादे अष्टादशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कुत्ता और ऋषिका संवादविषयक एक सौ अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ७ श्लोक मिलाकर कुल ३५ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥