Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.118.21: अच्छे लोगों को इकट्ठा करो, जड़ता त्याग दो, सदा प्रसन्नचित्त रहो, अपने सेवकों का सदैव ध्यान रखो, कभी किसी पर क्रोध मत करो, अपना हृदय विशाल रखो ॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संगृहीतजनोऽस्तब्ध: प्रसन्नवदन: सदा।
सदा भृत्यजनापेक्षी न क्रोधी सुमहामना:॥ २१॥
अनुवाद
अच्छे लोगों को इकट्ठा करो, जड़ता त्याग दो, सदा प्रसन्नचित्त रहो, अपने सेवकों का सदैव ध्यान रखो, कभी किसी पर क्रोध मत करो, अपना हृदय विशाल रखो ॥21॥
Collect good people, give up inertia, always remain cheerful, always take care of your servants, never become angry with anyone, keep your heart large. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥