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mahabharat 12.117.d3-d4: ऐसे अनेक मृग और पक्षी हैं जो इन ऋषि की शरण में आये हैं और हाथियों तथा अन्य भयंकर पशुओं से भयभीत हैं। सम्भव है कि वे उन्हें शरभ का शरीर प्रदान करें, जो संसार के समस्त प्राणियों से श्रेष्ठ बलवान है।   |   mahabharat अध्याय 12.117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना  »  श्लोक d3-d4
 
 
श्लोक  12.117.d3-d4 
अन्येऽप्यत्र भयत्रस्ता: सन्ति हस्तिभयार्दिता:॥
मुनिमाश्रित्य जीवन्तो मृगा: पक्षिगणास्तथा।
तेषामपि कदाचिच्च शरभत्वं प्रयच्छति॥
सर्वसत्त्वोत्तमं लोके बलं यत्र प्रतिष्ठितम्।
 
 
अनुवाद
ऐसे अनेक मृग और पक्षी हैं जो इन ऋषि की शरण में आये हैं और हाथियों तथा अन्य भयंकर पशुओं से भयभीत हैं। सम्भव है कि वे उन्हें शरभ का शरीर प्रदान करें, जो संसार के समस्त प्राणियों से श्रेष्ठ बलवान है।
 
There are many other deer and birds who have taken refuge in this sage and are afraid of elephants and other dangerous animals. It is possible that he may grant them the body of Sharabha, who has the strength superior to all the creatures in the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)