Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.117.d2: पूर्वकाल के कुत्ते और वर्तमान काल के शरभ ने सोचा कि इन महान ऋषि के प्रभाव से, उनके मात्र कथन से, मैंने शरभ का अत्यंत दुर्लभ शरीर प्राप्त किया है, जो सभी प्राणियों के लिए भयानक है।   |   mahabharat अध्याय 12.117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  12.117.d2 
(चिन्तयामास च तदा शरभ: श्वानपूर्वक:।
अस्य प्रभावात् सम्प्राप्तो वाङ्मात्रेण तु केवलम्॥
शरभत्वं सुदुष्प्रापं सर्वभूतभयङ्करम्।
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल के कुत्ते और वर्तमान काल के शरभ ने सोचा कि इन महान ऋषि के प्रभाव से, उनके मात्र कथन से, मैंने शरभ का अत्यंत दुर्लभ शरीर प्राप्त किया है, जो सभी प्राणियों के लिए भयानक है।
 
The dog of earlier times and Sharabha of present times thought that due to the influence of this great sage, by his mere utterance, I have obtained the extremely rare body of Sharabha, which is dreadful for all creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)