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mahabharat 12.117.7: तत्पश्चात् उस क्षेत्र में एक भगवा सिंह आया, जो अपने भगवा रंग के कारण कुछ लाल दिखाई देता था। पर्वत की गुफाओं में उत्पन्न वह भयानक सिंह हाथी जाति का नाश करने वाला था।   |   mahabharat अध्याय 12.117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.117.7 
अथाजगाम तं देशं केसरी केसरारुण:।
गिरिकन्दरजो भीम: सिंहो नागकुलान्तक:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस क्षेत्र में एक भगवा सिंह आया, जो अपने भगवा रंग के कारण कुछ लाल दिखाई देता था। पर्वत की गुफाओं में उत्पन्न वह भयानक सिंह हाथी जाति का नाश करने वाला था।
 
Thereafter a saffron lion came to that region, which looked somewhat red due to its saffron colour. That terrible lion born in the caves of the mountain was the destroyer of the elephant race. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)