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mahabharat 12.117.3: उस अभिमानी और मदमस्त हाथी को आते देख बाघ भयभीत हो गया और पुनः ऋषि के पास शरण लेने चला गया।   |   mahabharat अध्याय 12.117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.117.3 
तं दृष्ट्वा कुञ्जरं मत्तमायान्तं बलगर्वितम्।
व्याघ्रो हस्तिभयात् त्रस्तस्तमृषिं शरणं ययौ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस अभिमानी और मदमस्त हाथी को आते देख बाघ भयभीत हो गया और पुनः ऋषि के पास शरण लेने चला गया।
 
On seeing that proud and intoxicated elephant approaching, the tiger became frightened and again went to the sage for shelter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)