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mahabharat 12.117.23: ऋषि के इस प्रकार शाप देते ही वह दुष्ट, नीच और मूर्ख शरभ पुनः कुत्ता हो गया॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.117.23 
ततो मुनिजनद्वेष्टा दुष्टात्मा प्राकृतोऽबुध:।
ऋषिणा शरभ: शप्तस्तद्‍रूपं पुनराप्तवान्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ऋषि के इस प्रकार शाप देते ही वह दुष्ट, नीच और मूर्ख शरभ पुनः कुत्ता हो गया॥ 23॥
 
As soon as the sage cursed him in this manner, the evil-spirited, mean and foolish Sharabha was again transformed into a dog.॥ 23॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि श्वर्षिसंवादे सप्तदशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कुत्ता तथा ऋषिका संवादविषयक एक सौ सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ७ श्लोक मिलाकर कुल ३० श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)