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mahabharat 12.117.10: उसे देखकर जंगली सिंह स्वयं भी भयभीत हो गया। सिंह बना कुत्ता महान वन में उसी आश्रम में रहने लगा।   |   mahabharat अध्याय 12.117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.117.10 
दृष्ट्वा च सोऽभवत् सिंहो वन्यो भयसमन्वित:।
स चाश्रमेऽवसत् सिंहस्तस्मिन्नेव महावने॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उसे देखकर जंगली सिंह स्वयं भी भयभीत हो गया। सिंह बना कुत्ता महान वन में उसी आश्रम में रहने लगा।
 
Seeing him the wild lion himself became afraid. The dog turned lion started living in the same ashram in the great forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)