Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.116.9: वह महर्षि का भक्त था और उनमें अत्यन्त आसक्त था। उपवास के कारण वह दुर्बल और दुर्बल हो गया था। वह भी फल, मूल और जल पर निर्वाह करता था, मन को वश में रखता था और ऋषितुल्य जीवन व्यतीत करता था॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह महर्षि का भक्त था और उनमें अत्यन्त आसक्त था। उपवास के कारण वह दुर्बल और दुर्बल हो गया था। वह भी फल, मूल और जल पर निर्वाह करता था, मन को वश में रखता था और ऋषितुल्य जीवन व्यतीत करता था॥9॥
He was a devotee of the great sage and was deeply attached to him. He had become weak and feeble due to fasting. He too lived on fruits, roots and water, controlled his mind and lived like a sage.॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥