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mahabharat 12.116.20: लंबे दांतों वाले और भूख के कारण खूंखार दिख रहे बाघ को जंगल में घूमते देख, चीते ने एक बार फिर अपनी जान बचाने के लिए ऋषि की शरण ली।   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.116.20 
व्याघ्रं दृष्ट्वा क्षुधाभुग्नं दंष्ट्रिणं वनगोचरम्।
द्वीपी जीवितरक्षार्थमृषिं शरणमेयिवान्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
लंबे दांतों वाले और भूख के कारण खूंखार दिख रहे बाघ को जंगल में घूमते देख, चीते ने एक बार फिर अपनी जान बचाने के लिए ऋषि की शरण ली।
 
Seeing the tiger roaming in the forest with long teeth and looking vicious due to hunger, the leopard once again took refuge in the sage to save its life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)