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mahabharat 12.116.19: इसके बाद एक दिन एक बहुत ही खूंखार और भूखा बाघ तेंदुए का पीछा करने लगा, वह अपना मुंह खोलकर उसके दोनों जबड़े चाट रहा था और उसका खून पीना चाहता था।   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.116.19 
ततोऽभ्ययान्महारौद्रो व्यादितास्य: क्षुधान्वित:।
द्वीपिनं लेलिहद्वक्रो व्याघ्रो रुधिरलालस:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद एक दिन एक बहुत ही खूंखार और भूखा बाघ तेंदुए का पीछा करने लगा, वह अपना मुंह खोलकर उसके दोनों जबड़े चाट रहा था और उसका खून पीना चाहता था।
 
Thereafter one day a very fierce and hungry tiger chased the leopard, licking both its jaws with its mouth wide open, wanting to drink its blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)