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mahabharat 12.116.15: वे सिद्धि-ऐश्वर्य से संपन्न ऋषि थे, जो सबके भावों को जानते थे और समस्त प्राणियों की भाषा समझते थे। उस कुत्ते के भय का कारण जानकर उन्होंने उससे कहा॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.116.15 
स मुनिस्तस्य विज्ञाय भावज्ञो भयकारणम्।
रुतज्ञ: सर्वसत्त्वानां तमैश्वर्यसमन्वित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे सिद्धि-ऐश्वर्य से संपन्न ऋषि थे, जो सबके भावों को जानते थे और समस्त प्राणियों की भाषा समझते थे। उस कुत्ते के भय का कारण जानकर उन्होंने उससे कहा॥15॥
 
He was a sage endowed with the opulence of Siddhi, who knew everyone's feelings and understood the language of all living beings. Knowing the reason for that dog's fear, he said to him. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)