Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.116.14-15h: ‘प्रभो! यह तेंदुआ कुत्तों का शत्रु है और मुझे मारना चाहता है। महामुनि! महाबाहो! आप कुछ ऐसा कीजिए कि आपकी कृपा से मुझे इस तेंदुआ से भय न रहे। आप सर्वज्ञ हैं, इसमें संशय नहीं है। (अतः मेरी प्रार्थना सुनिए और उसे अवश्य पूर्ण कीजिए)॥14 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्वशत्रुर्भगवन्नेष द्वीपी मां हन्तुमिच्छति।
त्वत्प्रसादाद् भयं न स्यादस्मान्मम महामुने॥ १४॥
तथा कुरु महाबाहो सर्वज्ञस्त्वं न संशय:।
अनुवाद
‘प्रभो! यह तेंदुआ कुत्तों का शत्रु है और मुझे मारना चाहता है। महामुनि! महाबाहो! आप कुछ ऐसा कीजिए कि आपकी कृपा से मुझे इस तेंदुआ से भय न रहे। आप सर्वज्ञ हैं, इसमें संशय नहीं है। (अतः मेरी प्रार्थना सुनिए और उसे अवश्य पूर्ण कीजिए)॥14 1/2॥
‘Lord! This leopard is the enemy of dogs and wants to kill me. Mahamuni! Mahabaho! Please do something so that by your grace I do not have to fear this leopard. You are omniscient, there is no doubt about it. (So please listen to my prayer and definitely fulfill it)’॥ 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥