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mahabharat 12.116.13: हे प्रजानाथ! हे मनुष्यों के स्वामी! उस क्रूर चीते को आते देखकर प्राण बचाने वाले ऋषि से कुत्ते ने जो कहा, उसे सुनो -॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.116.13 
दृष्ट्वा तं क्रूरमायान्तं जीवितार्थी नराधिप।
प्रोवाच श्वा मुनिं तत्र तच्छृणुष्व विशाम्पते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! हे मनुष्यों के स्वामी! उस क्रूर चीते को आते देखकर प्राण बचाने वाले ऋषि से कुत्ते ने जो कहा, उसे सुनो -॥13॥
 
Prajanath! O Lord of men! Listen to what the dog said to the sage trying to save his life when he saw that ferocious leopard approaching -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)