Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.115.16-17: जिस राजा के मंत्री कुलीन हैं, जो धन के लोभ से विचलित नहीं होते, जो सदैव राजा के साथ रहते हैं, उसे अच्छी सलाह देते हैं, गुणवान हैं, सम्बन्धियों को जानते हैं, भविष्य के लिए अच्छी व्यवस्था करते हैं, काल के ज्ञान में निपुण हैं और भूतकाल के लिए शोक नहीं करते, वह राजा अपने राज्य का फल भोगता है॥ 16-17॥ | mahabharat अध्याय 12.115: राजा तथा राजसेवकोंके आवश्यक गुण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस राजा के मंत्री कुलीन हैं, जो धन के लोभ से विचलित नहीं होते, जो सदैव राजा के साथ रहते हैं, उसे अच्छी सलाह देते हैं, गुणवान हैं, सम्बन्धियों को जानते हैं, भविष्य के लिए अच्छी व्यवस्था करते हैं, काल के ज्ञान में निपुण हैं और भूतकाल के लिए शोक नहीं करते, वह राजा अपने राज्य का फल भोगता है॥ 16-17॥
A king whose ministers are of noble birth, who cannot be swayed by greed for money, who always remain with the king, who give him good advice, are virtuous, have knowledge of relations, who make good arrangements for the future, are adept in the knowledge of time and do not grieve for the past, that king enjoys the fruits of his kingdom.॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥