Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.114.20: क्रूर और मूर्ख मनुष्य यदि क्रोधित हो जाए तो वह किसी को थप्पड़ मार सकता है, उसके मुँह पर धूल या भूसी फेंक सकता है तथा दाँत दिखाकर उसे डरा सकता है। उसके द्वारा सभी प्रकार के बुरे इरादे संभव हैं ॥20॥ | mahabharat अध्याय 12.114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रुद्धो दशार्धेन हि ताडयेद् वा
स पांसुभिर्वा विकिरेत् तुषैर्वा।
विवृत्य दन्तांश्च विभीषयेद् वा
सिद्धं हि मूढे कुपिते नृशंसे॥ २०॥
अनुवाद
क्रूर और मूर्ख मनुष्य यदि क्रोधित हो जाए तो वह किसी को थप्पड़ मार सकता है, उसके मुँह पर धूल या भूसी फेंक सकता है तथा दाँत दिखाकर उसे डरा सकता है। उसके द्वारा सभी प्रकार के बुरे इरादे संभव हैं ॥20॥
If a cruel and foolish person becomes angry, he can slap someone, throw dust or husk on his face and scare him by showing his teeth. All kinds of evil intentions are possible through him. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥