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mahabharat 12.114.2: भीष्म बोले, "हे राजन! सुनिए, मैं आपसे वही कह रहा हूँ जो इस विषय पर सदैव कहा गया है। शुद्ध मन वाला मनुष्य इस संसार में मूर्ख व्यक्ति के कठोर वचनों को भी सदैव सहन कर लेता है।   |   mahabharat अध्याय 12.114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.114.2 
भीष्म उवाच
श्रूयतां पृथिवीपाल यथैषोऽर्थोऽनुगीयते।
सदा सुचेता: सहते नरस्येहाल्पमेधस:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! सुनिए, मैं आपसे वही कह रहा हूँ जो इस विषय पर सदैव कहा गया है। शुद्ध मन वाला मनुष्य इस संसार में मूर्ख व्यक्ति के कठोर वचनों को भी सदैव सहन कर लेता है।
 
Bhishma said, "O King! Listen, I am telling you what has always been said on this subject. A man with a pure mind always tolerates the harsh words of a foolish person in this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)