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mahabharat 12.114.13: जो मनुष्य बन्द द्वार के पीछे दूसरों की निन्दा करता है, वह सैकड़ों लोगों को जो भी दान या यज्ञ देता है, उसके सारे कर्म तत्काल नष्ट हो जाते हैं ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.114.13 
तादृग्जनशतस्यापि यद् ददाति जुहोति च।
परोक्षेणापवादी यस्तं नाशयति तत्क्षणात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बन्द द्वार के पीछे दूसरों की निन्दा करता है, वह सैकड़ों लोगों को जो भी दान या यज्ञ देता है, उसके सारे कर्म तत्काल नष्ट हो जाते हैं ॥13॥
 
A person who slanders others behind closed doors, instantly destroys all the deeds of whatever charity or sacrifice he makes to hundreds of people. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)