Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.114.10: जब मोर नाचता है, तो वह अपने गुप्त अंगों को प्रकट करता है। उसी प्रकार जो मूर्ख अनुचित आचरण करता है, वह अपने बुरे कर्मों द्वारा अपने छिपे हुए दोषों को प्रकट करता है॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब मोर नाचता है, तो वह अपने गुप्त अंगों को प्रकट करता है। उसी प्रकार जो मूर्ख अनुचित आचरण करता है, वह अपने बुरे कर्मों द्वारा अपने छिपे हुए दोषों को प्रकट करता है॥10॥
When the peacock dances, it exposes its private parts. Similarly, a fool who behaves inappropriately reveals his hidden faults through his evil actions.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥