श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.114.1 
युधिष्ठिर उवाच
विद्वान् मूर्खप्रगल्भेन मृदुतीक्ष्णेन भारत।
आक्रुश्यमान: सदसि कथं कुर्यादरिंदम॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे शत्रुनाशक भरत! यदि कोई हठी मूर्ख सभा में किसी विद्वान् पुरुष की मीठी या कठोर वाणी से निन्दा करने लगे, तो उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?"
 
Yudhishthira asked, "O enemy-destroyer, Bharata! If a stubborn fool starts criticizing a learned man in a gathering with sweet or harsh words, how should he behave with him?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)