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mahabharat 12.113.9: नदी का वेग आता देखकर बाँस का वृक्ष झुक जाता है, परन्तु अन्य वृक्ष ऐसा नहीं करते; अतः जब नदी का वेग कम हो जाता है, तब वह पुनः अपने स्थान पर आ जाता है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.113.9 
वेतसो वेगमायातं दृष्ट्वा नमति नापरे।
सरिद्वेगेऽव्यतिक्रान्ते स्थानमासाद्य तिष्ठति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
नदी का वेग आता देखकर बाँस का वृक्ष झुक जाता है, परन्तु अन्य वृक्ष ऐसा नहीं करते; अतः जब नदी का वेग कम हो जाता है, तब वह पुनः अपने स्थान पर आ जाता है॥9॥
 
The bamboo tree bends when it sees the force of the river coming, but the other trees do not do so; hence, when the force of the river subsides, it again comes back to its original place.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)