Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.113.8: गंगा बोलीं - हे नदियों के स्वामी! ये वृक्ष अपने स्थान पर अकड़कर खड़े रहते हैं, हमारे प्रवाह के आगे सिर नहीं झुकाते। इसी प्रतिकूल व्यवहार के कारण इन्हें नष्ट होकर अपना स्थान छोड़ना पड़ता है; किन्तु बाँस ऐसा नहीं है। | mahabharat अध्याय 12.113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गंगा बोलीं - हे नदियों के स्वामी! ये वृक्ष अपने स्थान पर अकड़कर खड़े रहते हैं, हमारे प्रवाह के आगे सिर नहीं झुकाते। इसी प्रतिकूल व्यवहार के कारण इन्हें नष्ट होकर अपना स्थान छोड़ना पड़ता है; किन्तु बाँस ऐसा नहीं है।
Ganga said - O Lord of rivers! These trees stand stiffly at their places, they do not bow their heads in front of our flow. Due to this unfavourable behaviour they have to leave their places after getting destroyed; but the bamboo is not like that.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥