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mahabharat 12.113.7: इस प्रकार प्रश्न करने पर गंगाजी ने नदियों के स्वामी समुद्र से निम्नलिखित अत्यन्त अर्थपूर्ण, युक्तिसंगत और प्रिय वचन कहे ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.113.7 
तत्र प्राह नदी गंगा वाक्यमुत्तममर्थवत्।
हेतुमद् ग्राहकं चैव सागरं सरिताम्पतिम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रश्न करने पर गंगाजी ने नदियों के स्वामी समुद्र से निम्नलिखित अत्यन्त अर्थपूर्ण, युक्तिसंगत और प्रिय वचन कहे ॥7॥
 
After being asked this question, the river Ganga told the following very meaningful, logical and pleasing words to the ocean, the lord of rivers. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)