Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.113.5: बेंत का शरीर बहुत पतला है, मानो कुछ भी नहीं है। उसमें कोई बल नहीं है और वह आपकी विशेष धार से चिपक जाता है; फिर भी आप उसे नहीं ला सके, इसका क्या कारण है? क्या आप लापरवाही के कारण उसे कभी नहीं लाए या उसने आपका कोई उपकार किया है?॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अकायश्चाल्पसारश्च वेतस: कूलजश्च व:।
अवज्ञया वा नानीत: किं च वा तेन व: कृतम्॥ ५॥
अनुवाद
बेंत का शरीर बहुत पतला है, मानो कुछ भी नहीं है। उसमें कोई बल नहीं है और वह आपकी विशेष धार से चिपक जाता है; फिर भी आप उसे नहीं ला सके, इसका क्या कारण है? क्या आप लापरवाही के कारण उसे कभी नहीं लाए या उसने आपका कोई उपकार किया है?॥5॥
The body of the cane is very thin, almost like nothing. It has no strength and it sticks to your special edge; still you could not bring it, what is the reason? Did you never bring it due to negligence or has it done any favor to you?॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥