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mahabharat 12.113.4: समुद्र ने कहा, "हे नदियों! मैं देख रहा हूँ कि जब तुम बाढ़ के कारण लबालब भर जाती हो, तो तुम बड़े-बड़े वृक्षों को जड़ और शाखाओं सहित उखाड़कर अपने प्रवाह में बहा ले जाती हो; परन्तु उनमें एक भी बाँस का वृक्ष दिखाई नहीं देता।" ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.113.4 
सागर उवाच
समूलशाखान् पश्यामि निहतान् कायिनो द्रुमान्।
युष्माभिरिह पूर्णाभिर्नद्यस्तत्र न वेतसम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
समुद्र ने कहा, "हे नदियों! मैं देख रहा हूँ कि जब तुम बाढ़ के कारण लबालब भर जाती हो, तो तुम बड़े-बड़े वृक्षों को जड़ और शाखाओं सहित उखाड़कर अपने प्रवाह में बहा ले जाती हो; परन्तु उनमें एक भी बाँस का वृक्ष दिखाई नहीं देता।" ॥4॥
 
The ocean said, "O rivers! I see that when you are filled to the brim due to floods, you uproot huge trees along with their roots and branches and carry them along in your flow; but no bamboo tree is visible among them." ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)