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मारुतोदकवेगेन ये नमन्त्युन्नमन्ति च।
ओषध्य: पादपा गुल्मा न ते यान्ति पराभवम्॥ ११॥
अनुवाद
जो पौधे, वृक्ष और लताएँ वायु और जल के वेग से झुक जाते हैं और वेग कम होने पर सिर ऊपर उठा लेते हैं, वे कभी पराजित नहीं होते ॥11॥
Those plants, trees and creepers which bend due to the force of wind and water and raise their heads when the force subsides, are never defeated. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥