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युधिष्ठिर उवाच
राजा राज्यमनुप्राप्य दुर्लभं भरतर्षभ।
अमित्रस्यातिवृद्धस्य कथं तिष्ठेदसाधन:॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, 'हे भरतश्रेष्ठ! दुर्लभ राज्य पाकर भी यदि राजा सेना और कोष आदि साधनों से रहित हो, तो वह सब प्रकार से श्रेष्ठ शत्रु के सामने कैसे टिक सकता है?'
Yudhishthira asked, 'O best of the Bharatas! Even after acquiring a rare kingdom, if the king is devoid of resources like army and treasury etc., how can he stand before an enemy who is superior in all respects?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥