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mahabharat 12.112.6: ऊँट बोला - हे प्रभु! आपकी कृपा से मेरी गर्दन बहुत बड़ी हो जाए, जिससे जब मैं चरने जाऊँ तो सौ योजन से भी अधिक दूरी से खाद्य पदार्थ खा सकूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.112.6 
उष्ट्र उवाच
भगवंस्त्वत्प्रसादान्मे दीर्घा ग्रीवा भवेदियम्।
योजनानां शतं साग्रं गच्छामि चरितुं विभो॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ऊँट बोला - हे प्रभु! आपकी कृपा से मेरी गर्दन बहुत बड़ी हो जाए, जिससे जब मैं चरने जाऊँ तो सौ योजन से भी अधिक दूरी से खाद्य पदार्थ खा सकूँ।
 
The camel said - O Lord! May by your grace my neck become very large, so that when I go for grazing, I can eat food items from more than a hundred yojanas away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)