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mahabharat 12.112.4: प्रजापतयुग (सतयुग) में एक महान ऊँट था। उसे अपने पूर्वजन्म की बातें याद आ गईं। उसने कठोर व्रतों का व्रत लिया और वन में घोर तपस्या करने लगा। 4.   |   mahabharat अध्याय 12.112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.112.4 
जातिस्मरो महानुष्ट्र: प्राजापत्ये युगेऽभवत्।
तप: सुमहादातिष्ठदरण्ये संशितव्रत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्रजापतयुग (सतयुग) में एक महान ऊँट था। उसे अपने पूर्वजन्म की बातें याद आ गईं। उसने कठोर व्रतों का व्रत लिया और वन में घोर तपस्या करने लगा। 4.
 
There was a great camel in the Prajapatyuga (Satyuga). He remembered the things of his previous life. He took the vow of observing strict fasts and started a great penance in the forest. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)