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mahabharat 12.112.3: युधिष्ठिर! हमने ऊँट की महान कथा सुनी है, उसे सुनो। राजा को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.112.3 
न चैवं वर्तितव्यं स्म यथेदमनुशुश्रुम।
उष्ट्रस्य तु महद् वृत्तं तन्निबोध युधिष्ठिर॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! हमने ऊँट की महान कथा सुनी है, उसे सुनो। राजा को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए॥3॥
 
Yudhishthira! We have heard the great story of a camel, listen to it. A king should not behave like that.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)