Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.112.20: हे निष्पाप युधिष्ठिर! जो गुप्त मंत्रणा सुनता है, जिसके पास अच्छे सहायक होते हैं और जो कोई भी कार्य पूर्ण ज्ञान और समझ के साथ करता है, उसके पास ही धन स्थिर रहता है। सहायकों से युक्त राजा ही सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन कर सकता है। | mahabharat अध्याय 12.112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे निष्पाप युधिष्ठिर! जो गुप्त मंत्रणा सुनता है, जिसके पास अच्छे सहायक होते हैं और जो कोई भी कार्य पूर्ण ज्ञान और समझ के साथ करता है, उसके पास ही धन स्थिर रहता है। सहायकों से युक्त राजा ही सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन कर सकता है।
Sinless Yudhishthira! Only he who listens to secret advice, has good helpers and does any work with full knowledge and understanding, wealth remains stable with him. Only a king who is blessed with helpers can rule the entire earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥