Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.112.2: भीष्म बोले - 'हे मनुष्यों! राजा के कर्तव्य और उसके सुखी रहने के लिए जो कुछ किया जा सकता है, उसका निश्चय करके मैं तुम्हें बताता हूँ। उसे सुनो।'   |   mahabharat अध्याय 12.112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.112.2 
भीष्म उवाच
हन्त तेऽहं प्रवक्ष्यामि शृणु कार्यैकनिश्चयम्।
यथा राज्ञेह कर्तव्यं यच्च कृत्वा सुखी भवेत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - 'हे मनुष्यों! राजा के कर्तव्य और उसके सुखी रहने के लिए जो कुछ किया जा सकता है, उसका निश्चय करके मैं तुम्हें बताता हूँ। उसे सुनो।'
 
Bhishma said, 'O Lord of men! Having decided the duty of a king and whatever he can do to be happy, I am going to tell you about it. Listen to it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)