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mahabharat 12.112.11: जब वर्षा आरम्भ हुई, तो भूख और थकान से व्याकुल एक सियार अपनी पत्नी सहित शीघ्र ही गुफा में घुस आया। वह गर्मी से पीड़ित था और ठंड के कारण उसके सभी अंग अकड़ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 12.112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.112.11 
अथ शीतपरीताङ्गो जम्बुक: क्षुच्छ्रमान्वित:।
सदारस्तां गुहामाशु प्रविवेश जलार्दित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब वर्षा आरम्भ हुई, तो भूख और थकान से व्याकुल एक सियार अपनी पत्नी सहित शीघ्र ही गुफा में घुस आया। वह गर्मी से पीड़ित था और ठंड के कारण उसके सभी अंग अकड़ रहे थे।
 
When the rains started, a jackal, suffering from hunger and fatigue, soon entered the cave along with his wife. He was suffering from heat and all his limbs were stiff due to cold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)