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mahabharat 12.111.9: उन्होंने कहा, 'भाई गीदड़! तुम मांसाहारी प्राणी हो और भयंकर श्मशान में रहते हो, फिर भी तुम शुद्ध आचरण और विचारों से रहना चाहते हो - यह विपरीत निर्णय है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.111.9 
वसन् पितृवने रौद्रे शौचे वर्तितुमिच्छसि।
इयं विप्रतिपत्तिस्ते यदा त्वं पिशिताशन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, 'भाई गीदड़! तुम मांसाहारी प्राणी हो और भयंकर श्मशान में रहते हो, फिर भी तुम शुद्ध आचरण और विचारों से रहना चाहते हो - यह विपरीत निर्णय है॥9॥
 
He said, 'Brother jackal! You are a carnivorous creature and live in a dreadful cremation ground, yet you want to live with pure conduct and thoughts - this is a contrary decision.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)