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mahabharat 12.111.87: राजाओं के लिए योग्य व्यक्ति को पहचानना बहुत कठिन होता है, क्योंकि उनका मन चंचल होता है। सैकड़ों में से कोई एक ही ऐसा होता है जो हर प्रकार से योग्य होते हुए भी संदेह से परे होता है। 87   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  12.111.87 
सुदु:खं पुरुषज्ञानं चित्तं ह्येषां चलाचलम्।
समर्थो वाप्यशङ्को वा शतेष्वेकोऽधिगम्यते॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
राजाओं के लिए योग्य व्यक्ति को पहचानना बहुत कठिन होता है, क्योंकि उनका मन चंचल होता है। सैकड़ों में से कोई एक ही ऐसा होता है जो हर प्रकार से योग्य होते हुए भी संदेह से परे होता है। 87
 
'It is very difficult for kings to recognize a capable person because their mind is fickle. Out of hundreds, only one is found who is capable in every way and yet is beyond doubt. 87
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)