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mahabharat 12.111.84: आप मुझ पर संदेह करेंगे और मैं आपसे डरूँगा, जबकि आपके सेवक जो दूसरों में दोष ढूँढ़ते हैं, यहाँ उपस्थित हैं। वे मुझ पर तनिक भी स्नेह नहीं रखते और उन्हें संतुष्ट रखना मेरे लिए अत्यन्त कठिन है। इसके अतिरिक्त, इस मंत्री का कार्य भी अनेक प्रकार के छल-कपट से परिपूर्ण है॥ 84॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  12.111.84 
शंकितस्त्वमहं भीत: परच्छिद्रानुदर्शिन:।
अस्निग्धाश्चैव दुस्तोषा: कर्म चैतद् बहुच्छलम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
आप मुझ पर संदेह करेंगे और मैं आपसे डरूँगा, जबकि आपके सेवक जो दूसरों में दोष ढूँढ़ते हैं, यहाँ उपस्थित हैं। वे मुझ पर तनिक भी स्नेह नहीं रखते और उन्हें संतुष्ट रखना मेरे लिए अत्यन्त कठिन है। इसके अतिरिक्त, इस मंत्री का कार्य भी अनेक प्रकार के छल-कपट से परिपूर्ण है॥ 84॥
 
‘You will doubt me and I will fear you, while your servants who find faults in others are present here. They do not have any affection for me and it is very difficult for me to keep them satisfied. Besides, the work of this minister is also full of many types of deceit and fraud.॥ 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)