Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.111.8: सियार का धार्मिक आचरण और विचार उसके सभी जाति-बंधुओं को पसन्द नहीं थे। यह सब उनके लिए असह्य हो गया; इसलिए वे प्रेमपूर्वक और नम्रतापूर्वक बोलकर उसकी बुद्धि को विचलित करने लगे। | mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सियार का धार्मिक आचरण और विचार उसके सभी जाति-बंधुओं को पसन्द नहीं थे। यह सब उनके लिए असह्य हो गया; इसलिए वे प्रेमपूर्वक और नम्रतापूर्वक बोलकर उसकी बुद्धि को विचलित करने लगे।
The jackal's pious conduct and thoughts were not liked by all his fellow-caste members. All this became intolerable for them; therefore, they started disturbing his intellect by speaking lovingly and humbly. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥