Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.111.77-79: जो लोग पद से गिराए जाने पर असंतुष्ट हैं, जिनका अपमान हुआ है, जिन्हें राजा ने स्वयं पुरस्कृत किया है, किन्तु दूसरों की निन्दा के कारण वे उस सम्मान से वंचित हो गए हैं, जो दुर्बल, लोभी, क्रोधी, भयभीत और छले हुए हैं, जिनका सब कुछ छीन लिया गया है, जो अभिमानी हैं, जिनकी आय छीन ली गई है, जो महत्वपूर्ण पद पाना चाहते हैं, जिन्हें सताया गया है, जो राजा पर विपत्ति आने की प्रतीक्षा में रहते हैं, जो छिपकर रहते हैं और जिनके हृदय में छल-कपट है, वे सभी सेवक शत्रुओं के कार्य में सहायक होते हैं॥ 77-79॥ | mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असंतुष्टाश्च्युता: स्थानान्मानात् प्रत्यवरोपिता:।
स्वयं चोपहृता भृत्या ये चाप्युपहिता: परै:॥ ७७॥
परिक्षीणाश्च लुब्धाश्च क्रुद्धा भीता: प्रतारिता:।
हृतस्वा मानिनो ये च त्यक्तादाना महेप्सव:॥ ७८॥
संतापिताश्च ये केचिद् व्यसनौघप्रतीक्षिण:।
अन्तर्हिता: सोपहितास्ते सर्वे परसाधना:॥ ७९॥
अनुवाद
जो लोग पद से गिराए जाने पर असंतुष्ट हैं, जिनका अपमान हुआ है, जिन्हें राजा ने स्वयं पुरस्कृत किया है, किन्तु दूसरों की निन्दा के कारण वे उस सम्मान से वंचित हो गए हैं, जो दुर्बल, लोभी, क्रोधी, भयभीत और छले हुए हैं, जिनका सब कुछ छीन लिया गया है, जो अभिमानी हैं, जिनकी आय छीन ली गई है, जो महत्वपूर्ण पद पाना चाहते हैं, जिन्हें सताया गया है, जो राजा पर विपत्ति आने की प्रतीक्षा में रहते हैं, जो छिपकर रहते हैं और जिनके हृदय में छल-कपट है, वे सभी सेवक शत्रुओं के कार्य में सहायक होते हैं॥ 77-79॥
'Those who are dissatisfied on being thrown down from their position, who have been insulted, who have been rewarded by the king himself but have been deprived of that honour because of being slandered by others, who are weak, greedy, short-tempered, fearful and deceived, who have been stripped of everything, who are arrogant, whose income has been snatched away, who want to get an important position, who have been persecuted, who are waiting for a calamity to befall the king, who live in hiding and have deceit in their hearts, all those servants are the ones who facilitate the work of the enemies.॥ 77-79॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥