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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा
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श्लोक 76
श्लोक
12.111.76
पूजितोऽहं त्वया पूर्वं पश्चाच्चैव विमानित:।
परेषामास्पदं नीतो वस्तुं नार्हाम्यहं त्वयि॥ ७६॥
अनुवाद
महाराज! पहले आपने मेरा आदर किया, फिर अपमान किया, शत्रु का पद दिया; अतः अब मैं आपके पास रहने योग्य नहीं हूँ।
‘Maharaj! First you respected me and then insulted me, put me in the position of an enemy; hence I am not worthy of staying with you anymore.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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