श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  12.111.74 
शार्दूलस्तं तु गोमायुं स्नेहात् प्रोत्फुल्ललोचन:।
अवारयत् स धर्मिष्ठं पूजया प्रतिपूजयन्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
सिंह ने धर्मात्मा सियार का बहुत आदर-सत्कार किया और उसे उपवास करने से रोका। उस समय उसकी आँखें स्नेह से चमक उठीं।
 
The lion honoured the pious jackal very well and stopped him from fasting. At that time his eyes lit up with affection. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)