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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.111.7 
श्मशाने तस्य चावासो गोमायो: सम्मतोऽभवत्।
जन्मभूम्यनुरोधाच्च नान्यवासमरोचयत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह श्मशान घाट में रहता था। उसका जन्म वहीं हुआ था, इसलिए उसे वह जगह पसंद थी। उसे कहीं और रहने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। 7.
 
He lived in the cremation ground. He was born there, so he liked that place. He had no interest in living anywhere else. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)