Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.111.60-61h: कोई व्यक्ति कितना ही पवित्र और परिश्रमी क्यों न हो, लोग उस पर दोषारोपण करते ही हैं। धर्मकार्य में लगे हुए वनवासी मुनि के भी तीन पक्ष होते हैं - शत्रु, मित्र और उदासीन॥60 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कोई व्यक्ति कितना ही पवित्र और परिश्रमी क्यों न हो, लोग उस पर दोषारोपण करते ही हैं। धर्मकार्य में लगे हुए वनवासी मुनि के भी तीन पक्ष होते हैं - शत्रु, मित्र और उदासीन॥60 1/2॥
‘No matter how pure and industrious a person is, people always accuse him. Even a forest dwelling sage engaged in religious activities has three sides – enemies, friends and indifferents.॥ 60 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥