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mahabharat 12.111.56-57h: यह कहकर वे क्षण भर में सियार के घर से मांस ले आए। मांस की चोरी जानकर और उन सेवकों की बातें सुनकर सिंह ने तब सियार को प्राणदंड देने का आदेश दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  12.111.56-57h 
तन्मांसं चैव गोमायोस्तै: क्षणादाशु ढौकितम्।
मांसापनयनं ज्ञात्वा व्याघ्र: श्रुत्वा च तद्वच:॥ ५६॥
आज्ञापयामास तदा गोमायुर्वध्यतामिति।
 
 
अनुवाद
यह कहकर वे क्षण भर में सियार के घर से मांस ले आए। मांस की चोरी जानकर और उन सेवकों की बातें सुनकर सिंह ने तब सियार को प्राणदंड देने का आदेश दिया।
 
Saying this, they brought the meat from the jackal's house in a moment. Knowing about the theft of the meat and hearing the words of those servants, the lion then ordered that the jackal be given death penalty. 56 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)