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श्री महाभारत
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श्लोक 53
श्लोक
12.111.53
इदं तस्येदृशं कर्म किं तेन न कृतं भवेत्।
श्रुतश्च स्वामिना पूर्वं यादृशो नैव तादृश:॥ ५३॥
अनुवाद
"महाराज! जब वह ऐसा काम कर सकता है, तो और क्या नहीं कर सकता? वह वैसा नहीं है जैसा स्वामीजी ने उसके बारे में पहले सुना था।"
‘Maharaj! When he can do such a deed, what else cannot he do? He is not like what Swamiji had heard about him earlier.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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