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mahabharat 12.111.5: उस समय सियार को अपने पूर्वजन्म के वैभव का स्मरण हो आया और वह अत्यन्त दुःखी हो गया, तथा सांसारिक सुखों से विरक्त हो गया। अतः उसने दूसरों का दिया हुआ मांस भी नहीं खाया।   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.111.5 
संस्मृत्य पूर्वभूतिं च निर्वेदं परमं गत:।
न भक्षयति मांसानि परैरुपहृतान्यपि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय सियार को अपने पूर्वजन्म के वैभव का स्मरण हो आया और वह अत्यन्त दुःखी हो गया, तथा सांसारिक सुखों से विरक्त हो गया। अतः उसने दूसरों का दिया हुआ मांस भी नहीं खाया।
 
At that time, remembering the splendour of his previous life, the jackal felt very sad and detached from worldly pleasures. Hence, he did not even eat the meat given to him by others. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)