श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.111.46 
यदर्थं चाप्यपहृतं येन तच्चैव मन्त्रितम्।
तस्य तद् विदितं सर्वं कारणार्थं च मर्षितम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
सियार को मांस चुराने वाले और उसे ऐसा करने की सलाह देने वाले के विषय में सब कुछ मालूम हो गया, परन्तु किसी कारणवश वह चुपचाप सहन करता रहा ॥46॥
 
The jackal came to know everything about the person who stole the meat and the person who advised him to do so. But for some reason he tolerated it silently. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)