श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.111.39 
एवमस्त्विति तेनासौ मृगेन्द्रेणाभिपूजित:।
प्राप्तवान् मतिसाचिव्यं गोमायुर्व्याघ्रयोनित:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
शेर ने उसका बहुत आदर किया और कहा, ‘ठीक है, ऐसा ही हो।’ सियार बाघ राजा का बुद्धिमान सचिव बन गया।
 
The lion honoured him greatly saying, 'Okay, so be it.' The jackal became the wise secretary of the tiger king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)